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Big Breaking: अप्रत्यक्ष रूप से मेहुल चौकसी समेत तीन साझीदारों को 8048 करोड़ का लोन Write Off

साकेत गोखले नाम के व्यक्ति द्वारा  आरटीआई के तहत मांगी गयी जानकारी के जवाब में रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने टॉप 50 विल्फुल डिफ़ॉल्टर की सूची जारी की है. सितम्बर 2019 तक के अकाउंट के आधार पर देश भर के टॉप डिफ़ॉल्टरों को कुल 68 हजार 607 करोड़ रूपए राईट ऑफ़ कर दिए गये है. राईट ऑफ़ अर्थात बैंक के बैलेंसशीट से लोन दी गयी राशि को बैड लोन मानकर निकाल दिया जाता है. अर्थात अगले वितीय वर्ष में उस राशि को बैलेसशीट में नहीं दर्शाया जाएगा. सरल भाषा में इसे डूबी हुई वह रकम माना जा सकता है जिसे देनदार भूल जाए और कभी भी वापस लेने के लिए कोई कार्रवाई की बाध्यता नहीं होगी. लेकिन इन ख़बरों में एक झूठ पूरे देश भर में फैलाया जा रहा है..या यूँ कहे कि सच छुपाया जा रहा है. जिसका खुलासा हम आज करने जा रहे है.

विल्फुल डिफ़ॉल्टर की इस सुविधा का लाभ उठाने वाले कंपनियों की सूची जारी कर दी गयी है. इसे जनसामान्य के शब्दों में लोन माफ़ी का चोर दरवाजा कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगा.  अब सवाल उठता है कि देश के टॉप ५० लोगों/कंपनियों के कुल 68 हजार 607 करोड़ रूपए माफ कर दिए गये है. ये कौन लोग है? इस सूची में कौन कौन है? यह लिस्ट भी आपको जाननी चाहिए.

इस कड़ी में ५० लोगों की सूची के टॉप २० लोगों के नामों पर चर्चा करने जा रहे है. मोटे तौर पर समझ लें कि यह वह क्लास है जो कभी भी मध्य वर्ग में शामिल नहीं  रहा है

टॉप २० लोगों में पिछड़े, दलित की संख्या अर्थात आरक्षण वाले नगण्य है. इन डिफ़ॉल्टर के सरनेम मेहता, चौकसी. झुनझुनवाला, सेठ इत्यादि ही है. इन कंपनियों के निदेशको के बैकग्राउंड में किसान, अथवा माध्यम वर्ग ना के बराबर  है. आइये इसकी सूची पर नजर डालते है.

 

इस सूचि को ध्यान से देखिये अधिकाँश नामों के  सरनेम इस देश के लूटतंत्र की कहानी बयां कर रहे है. इस सूची में देश की पिछड़ी जातियों, शोषितों की झलक भी नहीं मिलेगी. सब के सब तिजारत के पेशे के शहंशाह है. आप मेहुल चौकसी, संदीप झुनझुनवाला को देखिये या परम स्वदेशी स्वामी रामदेव के भाई राम भरत को….स्वामी रामदेव का नाम आया तो टेलिविज़न पर चलने वाले पतंजलि के विगयापनों को भी याद रखियेगा.. यह रामदेव की वह औषधीय दवा है. जिसे खाने के बाद देश के समाचार चैनलों को रामदेव का आर्थिक कुकर्म नहीं दिखाई देता है.. और ये लाला रामदेव दिन भर टेलीविजन की फुटेज खाते हुए देश को देशभक्ति के आसन सिखाते है..और परदे के पीछे उनके भाई और पतंजलि ग्रुप की कम्पनियाँ देश के करोड़ो गरीबों के राशन खरीदने भर की राशि राईट ऑफ़ करवा लेती है. ये बीस नाम उसी ५० विल्फुल डिफ़ॉल्टरों की सूची में शीर्ष क्रम पर है..जिसके लिए सरकार से लेकर आरबीआई तक प्रेस बयान जारी कर सफाई दे रही है.

 

इस सूची के परिलक्षित होता वर्गीय चरित्र से भी महत्वपूर्ण बात यह है की देश में संस्थागत लुट की छुट के मॉडल  की तह तक जाने लायक  आम आदमी की समझ हो. यदि यह आम आदमी की  समझ में नहीं आएगा तो जनता सरकार से सवाल कैसे करेगी.

इस लिस्ट में सबसे शीर्ष पर चर्चित नाम मेहुल भाई ओह सोरी मेहुल चौकसी का है. हजारों करोड़ों के घोटाले के आरोपी मेहुल चौकसी के गीतांजलि ग्रुप की कुल २३ कम्पनियाँ रजिस्टर्ड हो चुकी है. जिनमे से अभी भी १७ कम्पनियाँ चल रही है. इनका धंधा चल रहा है. इन कंपनियों के पास अभी भी इतनी सम्पति है कि लोन की रकम ब्याज समेत भरपाई की जा सकें.

इन १९ कंपनियों के अलावे ६ कंपनियों को स्ट्राइक ऑफ़ कर दिया गया है.. अर्थात स्ट्राइक ऑफ़ का मतलब यह है कि कंपनी के निदेशक खुद ही कारपोरेट विभाग को आवेदन देकर कंपनी बंद करवा दें अथवा गलत पाए जाने पर कंपनी मामलो का विभाग भी कंपनियों को स्ट्राइक ऑफ़ या यूँ कहे कि कंपनी को बंद कर देता है.

इसके अलावे एक दूसरी कंपनी के साथ मर्ज कर दिया गया है. अर्थात अकेले मेहुल चौकसी कुल २३ कंपनियों में डाइरेक्टर, पार्टनर, प्रमोटर इत्यादि पदों पर रहा है.

ध्यान रहे कि यहाँ हम मेहुल चौकसी के परिवार के सदस्यों की जानकारी नहीं दे रहे है. जबकि कारपोरेट लूट में अमूमन होता यह है कि एक-एक उद्योगपति घराने लगभग सभी वयस्क सदस्यों के नाम पर अलग अलग कम्पनियाँ रजिस्टर्ड करवाए होते है. जिनमे से कुछ शेल कम्पनिया होती है.. तो कुछ ऐसी कम्पनियाँ भी होती है…. जिनके कारोबार का उदेश्य ही उन यह होता है कि मदर कंपनियों के बैलेंश शीट के मुनाफे को घाटे के रूप में दिखाया जा सके. ऐसा करने से कर्मचारियों को देने वाले बोनस, सैलरी इन्क्रीमेंट, के अलावे सरकारी प्रोत्साहन, बैंक लोन को पचाने के उद्देश्य शामिल होते है.

फिर से हम मेहुल चौकसी के कारनामे पर आते है. मुख्य धारा का मीडिया बता रहा है की  बैंक ने मेहुल चौकसी के पांच हजार चार सौ ब्यानवे करोड़ रूपये राईट ऑफ़ कर दिए है. अर्थात बैलेंशशीट से इस रकम को बैड लोन मानते हुए हटा दिया गया है. यह लोन माफ़ी का नायाब तरीका है. लेकिन आपको समझना यह होगा कि क्या ऐसा करना उचित है.. जिस मेहुल चौकसी के 17 कंपनियों का कारोबार फलफूल रहा हो.. इसके अलावे दर्जनों दूसरी  कंपनियों में निदेशक और साझीदार हो, उसके यह रकम क्यों नहीं चुकाना चाहिए?

मेहुल चौकसी के फ्रॉड के कारण  कितने ही खाताधारकों के खाते से भुगतान रुक गया था. कितनों की बेटियों की शादियाँ रुक गयी थी. कितनों के पिताओं का समय पर इलाज नहीं हो सका था. वैसे मेहुल चौकसी से वसूली करने की जगह यह सरकार उसे अभयदान दे रही है..उसे अवार्ड के रूप में उसे दिए गये लोन राईट ऑफ़ कर दे रही है.

क्या राईट ऑफ़ करने से पहले सरकार ने गीतांजलि जेम्स लिमिटेड के जरिये ग्राहकों से ठगी, फंड की हेराफेरी का हिसाब देश को दिया है. ऐसी खबरे सुर्ख़ियों में रही है कि  हीरे की नकली ज्वेलरी के कारोबार से मेहुल ने न सिर्फ बैंक को बल्कि ग्राहकों को भी चुना लगाया है. ऐसे ही ठग को अवार्ड देने वाली सरकार अब जनता को चुना लगा रही है.

मेहुल चौकसी के बारे में एंटिगुआ के पीएम ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मेहुल चौकसी धूर्त है.. उसे इंडिया को प्रत्यर्पित कर देंगे. उसे अपने पीएम कभी मेहुल भाई बुलाते रहे है. उस चौकसी पर सख्ती नहीं हो रही है तो आपको खुद ही नतीजे तक पहुँच जाने चाहिए.

 

मेहुल चौकसी का यह मॉडल लगभग देश के हर करप्ट कारपोरेट घरानों की कहानी जैसी ही है. यूँ समझ लीजिये की जैसे सड़क बनाने में, बिल्डिंग बनाने में, पुल बनाने में भ्रष्टाचार के मॉडल  में जैसी समानता पायी जाती है वैसी ही समानता करप्ट कारपोरट के लूट और फ्रॉड के सिस्टम में पायी जाती है. इस देश में ऐसा ही करप्ट कारपोरेट कल्चर पैदा हो गया है.  इसे बताने  के लिए आपको हम कुछ उदहारण दे रहे है.

साकेत गोखले के के सुचना के तहत मांगे गये जवाब मे राईट ऑफ़ किये गये 50  बकायादारों की लिस्ट के टॉप २० लोगों के आंकड़े मोटे तौर पर बताने जा रहे है.

इन सब में एकरूपता यह है की इन तमाम लोगों ने अनेक कम्पनियाँ खोल रखी है. इनकी कुछ कंपनियों को स्ट्राइक ऑफ़ कर दिया गया है.. तो कुछ को मर्ज कर दिया गया है तो कुछ एक्टिव है.

इस हेरफेर को ध्यान से आप देखेंगे तो मालुम चलेगा कि एक क्लास है जिसमे देश का चिरपरिचित एलीट क्लास ही शामिल है.. ये सब मिलकर देश को भरपूर लुट रहे है. यह संगठित लूट कैसे हो रहा है.  जरा देखिये.

50 कंपनियों की इस सूची में शामिल 3 कंपनियों गीताजंलि जेम्स लिमिटेड के निदेशक मेहुल चौकसी, गीली इंडिया लिमिटेड के निदेशक  धनेश सेठ और नक्षत्र ब्रांड लिमिटेड के निदेशक दिनेश गोपाल दास भाटिया तीनों के तार एक दुसरे से जुड़े हुए है.

मेहुल चौकसी कुल गीतांजलि ग्रुप के तहत कुल २३ कम्पनियां खोल रखा था. गीतांजलि ग्रुप की कुल ३ कंपनियों में नक्षत्र ब्रांड लिमिटेड के दिनेश गोपाल दस भाटिया भी निदेशक रहे है या है..

वैसे ही गीली इंडिया लिमिटेड के धनेश सेठ मेहुल चौकसी के 10 कंपनियों में निदेशक  रहे है या है. कारपोरेट मामलों के डाटाबेस वेबसाइट जौबा कोर्प नाम की वेवसाइट पर दिए गये डाटा के आधार पर हम आपके सामने यह आंकड़ा पेश कर रहे है. ध्यान से इस रिपोर्ट को देखिये.

मेहुल चौकसी, धनेश सेठ और दिनेश भाटिया तीनों ही गीतांजलि ग्रुप की गीतांजलि लाइफस्टाइल लिमिटेड और गीतांजलि एक्सपोर्ट कारपोरेशन लिमिटेड  में निदेशक है.

मेहुल चौकसी और दिनेश भाटिया गीतांजलि ज्वेलरी रिटेल लिमिटेड में भी निदेशक है.

मेहुल चौकसी और धनेश सेठ गीतांजलि जेम्स लिमिटेड, डायनामिक इन्फ्राजोन प्राइवेट लिमिटेड एल्जो प्राइवेट लिमिटेड, एमएमटीसी गीतांजलि लिमिटेड, Mast Jewelers Distributation LLP, गीतांजलि रिटेल वेंचर लिमिटेड,   गीतांजलि रिटेलर एलएलपी, गीतांजलि गोल्ड एंड प्रीसिअस एलएलपी में निदेशक है.

जिस  नक्षत्र ब्रांड लिमिटेड  के 1109 करोड़ लोन राईट ऑफ़ हुए है उसमे  दिनेश भाटिया के साथ साथ धनेश सेठ भी  निदेशक है.. तो गीली इंडिया लिमिटेड जिसके 1447 करोड़ राईट ऑफ़ हुए है.. इस कंपनी के निदेशक धनेश सेठ के साथ साथ दिनेश भाटिया भी निदेशक है. वही इस सूची में टॉप पर गीतांजली जेम्स लिमिटेड में मेहुल चौकसी के साथ साथ धनेश सेठ भी निदेशक है. जिसके 5492 करोड़ लोन राईट ऑफ़ हुए है.

 

अर्थात  आपको समझ में आ जाना चाहिए कि मेहुल चौकसी, धनेश सेठ और दिनेश भाटिया एक ही सिंडिकेट के चट्टे बट्टे है. और इन २० लोगों की सूचि में तीनों की अलग अलग कंपनियों के लोन को राईट ऑफ़ किया गया है. एक बार फिर से बता दें कि मेहुल चौकसी  को राईट ऑफ़ किये गये लोन के बारे में आधा सच बोल रहा है..या सच छुपा रहा है. अब तक हमारी जानकारी अनुसार आरबीआई ने मेहुल चौकसी से जुड़े कंपनियों को राईट ऑफ़ किये गये लोन की राशि 8048 करोड़ है. और यही सच आपसे देश का गोदी मीडिया छुपा रहा है.

 

इन खबरों पर हंगामा मचने के बाद वित् मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान आया कि कांग्रेस इस मामले को लेकर देश को गुमराह कर रही है. बैंकों द्वारा राईट ऑफ़ किये गये लोन की प्रक्रिया को  एनपीए के रूप में  दिखाने के नियमों की वजह  के उद्देश्य से किया गया है. राईट ऑफ़ का मतलब लोन माफ़ी नहीं होता है.

वित् मंत्री जी! सवाल यहाँ भी उठता है… कि आपके पास चिदंबरम के सवालों का जवाब क्यों नहीं है जिसमें उन्होंने कहा कि राईट ऑफ़ लोन की प्रक्रिया भगोड़ो पर लागू नहीं होता है.  क्या आरबीआई के इन्हीं नियमों के हवाले से देश भर में किसानों को दिए गये पुराने लोन को नहीं चुकाए जाने पर एनपीए घोषित कर दिया गया है ? यदि ऐसा किया गया है तो यह रकम कितनी है..? क्या यह नीति घटिया और आर्थिक अपराधियों को लाभ पहुचाने वाली नहीं है……

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