हकसफा वाद के तहत जमीन पर दखल-कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पर सुझाव दे रहे हैं सुबोध कुमार
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सात साल से अधिक बंधक नहीं रखीं जा सकती है किसानों की जमीन

सुबोध कुमार

एक आदमी मुझसे मिलने आए और कहा कि उनके गांव क्षेत्र में बहुत सारे गरीब किसानों की जमीन लंबे समय से साहूकार के यहां गिरवी/रेहन(mortgage) रखी हुई है और साहूकार(mortgagee) उस जमीन पर अभी भी दखल जमाए बैठा है। उसने इतना सूद लाद दिया है कि बेचारा किसान(mortgagor) जमीन छुड़वा नहीं पा रहा।

यह सुनकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। मैंने उन्हें कहा कि बिहार साहूकारी अधिनियम (Bihar money-lenders act),1974 की धारा 12 के अनुकूल कोई भी साहूकार किसी की जमीन को सात साल के बाद गिरवी रख ही नहीं सकता। अगर 7 साल गिरवी का पूरा हो चुका है तो सूद चुकाना तो दूर, बिना मूलधन चुकाए ही जमीन वापस मूल किसान के पास लौट आएगी। अगर किसान ने जमीन इस एक्ट के प्रवृत्त होने के पहले से ही गिरवी रखी हुई हो तो यह एक्ट उस पर भी लागू होगा।



इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय के कई आदेश हैं जो किसानों के पक्ष में हैं। इसमें कहीं कोई संदेह की गुंजाइश ही नहीं है। गिरवी रखने के 7 साल के बाद साहूकार के ऋण के सूद की कौन कहे, बिना ऋण चुकता किए ही स्वयमेव जमीन साहूकार से किसान को वापस लौट जाएगी।

मेरा ऐसा कहने पर वो आश्चर्यचकित हो गए और कहा कि अभी भी जानकारी के अभाव में लोगों को साहूकार द्वारा परेशान किया जा रहा है। Money-lenders act की प्रति मांगते हुए उन्होंने मुझसे इस समस्या के संबंध में एक पोस्ट लिखने का भी निवेदन किया। जिससे सुदूर गांव/देहात के लोग तक भी इसकी जानकारी पहुंच सके और उन्हें उनका अधिकार प्राप्त हो सके।

आखिर Bihar money-lenders act, 1974 की धारा 12 है क्या ?

12. Usufructuary mortgage and their redemption.- Notwithstanding anything to the contrary,contained in any law or anything having the force of law or in any agreement, the principal amount and all dues in respect of an usufructuary mortgages relating to any agricultural land,whether executed before or after the commencement of this Act, shall be deemed to have been fully satisfied and the mortgage shall be deemed to have been wholly redeemed on expiry of a period of seven years from the date of the execution of the mortgage bond in respect of such land and the mortgagor shall be entitled to recover possession of the mortgaged land in the manner prescribed under the Rules:
Provided that if the mortgage bond had been executed before the commencement of this Act nothing in this section shall entitle the mortgagor to claim any accounts or profits from the mortgagee by the reason of the benefit of redemption of the mortgage under this provisions.




ऐसा ही एक मामला महाराजगंज का सामने आया था जहां नवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक लड़की अपने पिता की तरफ से (उसके पिता बीमारी के कारण कोर्ट आने से लाचार थे, वकील लोग भी इस बात को जानते थे) ऐसे ही मामले में केस लड़ने DCLR के न्यायालय में आया करती थी। उस समय मैं महाराजगंज का DCLR हुआ करता था। मैंने फैसला उस लड़की के पिता के पक्ष में दिया था। मेरा स्थानांतरण हो जाने के बाद एक दिन उस लड़की ने मुझे फोन कर कहा कि उसका जमीन पर कब्जा हो गया है। मुझे उसकी बात सुनकर बहुत आत्म-संतोष हुआ। किसी के चेहरे पर खुशी लाना वाकई बहुत बड़ी बात होती है।

आप भी अपने क्षेत्र के लोगों को इस एक्ट के बारे में बताएं और जो पीड़ित हों, उनकी मदद कर उनके चेहरे पर मुस्कान लाएं।

(लेखक बिहार प्रशासनिक सेवा के उप सचिव स्तर के पदाधिकारी हैं और सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों को लेकर विमर्श में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. उपरोक्त आलेख उनसे हुई बातचीत पर आधारित है)

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