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राज्यसभा में कुशवाहा समाज को नजरअंदाज करने पर आश्चर्य नहीं, समाज अपनी ताकत को पहचाने- सुदर्शन महतो

भाजपा और राजद द्वारा राज्यसभा में कुशवाहा समाज के प्रतिनिधित्व नहीं देने पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए. दरअसल ये दोनों राजनीतिक दल संगठन के स्तर पर, विधानसभा के स्तर पर भी कुशवाहा समाज को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देते है. इसलिए ऐसे दलों से किसी प्रकार की उम्मीद करना मुर्खता है. उक्त बातें कहते हुए  ‘युवा जोश’ के संयोजक सुदर्शन महतो ने कहा कि राजद और भाजपा से नाता रखने वाले कुशवाहा समाज के नेताओं को समाजहित में  नाता तोड़ लेना चाहिए.

आगे उन्होंने कहा कि वैसे कुशवाहा समाज जाति नहीं जमात की राजनीति में विश्वास रखता है. टिकट नहीं देने का मुद्दा जातीय स्वाभिमान का मुद्दा नहीं बनना चाहिए. बल्कि ओबीसी, पिछड़े वर्ग के आंदोलन के नाम पर कुशवाहा समाज के तमाम बुद्धिजीवियों को आगे बढ़ना चाहिए.

बिहार में जंगलराज के खात्मे के लिए कुशवाहा समाज के राजनीतिक संघर्ष की बड़ी भूमिका रही है. तब भी जातीय स्वाभिमान को उभारने की समाज के लोगों ने कोशिश नहीं कि थी. कुशवाहा समाज जमात की बात करने के लिए जाना जाता है. शहीद जगदेव प्रसाद का संघर्ष भी जमात को लेकर था. इसलिए उम्मीद है कि जाति-जाति चिल्लाने वाले लोग समाज की नब्ज को टटोल कर ही बात करेंगे और जाने-अनजाने कुशवाहा समाज को अन्य वर्गों से दूर करने कि कोशिश से बचेंगे.

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