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नीतीश सरकार के पांच अफसर जिनके आइडिया को आम लोगों से खूब मिली वाहवाही

विजय प्रकाश

वर्ष 2008 में समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव के पद पर पदस्थापित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी विजय प्रकाश ने बिहार के मुसहर समाज के लोगों के जीवन स्तर को बदलने के लिए ‘रैट मीट’ के पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की चर्चा छेड़ी थी. तब नीतीश सरकार के कार्यकाल के आरंभिक दिनों में इसे काफी सराहा गया था. हालांकि यह अलग बात है कि योजना जमीन पर सफल नहीं हो सकी. लेकिन इस आइडिया के कारण ही एक अन्तराष्ट्रीय एजेंसी ने आईएएस विजय प्रकाश को अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत दुनिया भर के बीस ऐसे लोगों की सूची में रखा गया था जो अपने अनूठे आइडिया के कारण चर्चा में थे.

सुबोध कुमार

वर्तमान में राजस्व विभाग में उप सचिव स्तर के पदाधिकारी बीपीएससी 44वीं बैच के  अधिकारी सुबोध कुमार इन दिनों चर्चा में है. श्री कुमार के ख़बरों में रहने का कारण बिहार सरकार द्वारा पारिवारिक जमीन बंटवारा रजिस्ट्री को नाम मात्र शुल्क पर किए जाने का आदेश है. नीतीश कुमार को यह सुझाव ‘लोक संवाद’ कार्यक्रम में 12 जून 2017 को शेखपुरा के तत्कालीन एसडीओ सुबोध कुमार ने ही दिया था. भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान के छात्र रहे  सुबोध  कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह सुझाव देने के लिए एक दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर पटना पहुंचे थे.  बताया जाता है कि श्री कुमार के इस सुझाव से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इतने प्रभावित हुए कि उन्हें ‘लोक संवाद’ कार्यक्रम के दौरान ही पटना में पदस्थापन के लिए तैयार रहने को कह दिया.

अरविंद कुमार सिंह  

वर्ष 2014 में कैमूर के तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद कुमार सिंह भभुआ शहर को ‘ग्रीन सिटी’ बनाने को लेकर चर्चा में रहे थे. बिहार प्रशासनिक सेवा से 2009 में प्रोन्नति के तहत भारतीय प्रशासनिक सेवा में भेजे गये श्री सिंह के इस प्रयास की काफी सराहना की गई थी. इस प्रोजेक्ट के तहत भभुआ की दीवारों को हरे रंग में रंग-रोगन करने का अभियान ही छेड़ दिया था. कुछ ही दिनों में भभुआ की दीवारें हरे रंग में नजर आने लगी. तब से अब तक भभुआ को ग्रीन सिटी बनाये रखने का संकल्प स्थानीय जनमानस के जेहन में है. हालांकि अरविंद कुमार सिंह सरकारी सेवा के दौरान इससे पहले औरंगाबाद को भी ‘पिंक सिटी’ बनाने के तहत शहर की दीवारों को गुलाबी रंगों से रंगने के अभियान के कारण भी चर्चा में थे.

आरसीपी सिंह

रामचंद्र प्रसाद सिंह उर्फ़ आरसीपी सिंह वर्तमान में जनता दल यू के संगठन महासचिव और राज्यसभा सांसद  है. भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार के साथ लंबे समय तक योगदान दिया है. बतौर प्रधान सचिव नीतीश कुमार के फैंसलों को अमलीजामा पहनाने का जिम्मा बखूबी संभाला करते थे. लेकिन आरसीपी सिंह एक आइडिया के कारण बिहार की छवि को दुनिया भर में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके है. कहा जाता है कि वर्ष 2006 में शुरु की गई मुख्यमंत्री बालिका साइकिल वितरण योजना आरसीपी सिंह के दिमाग की ही उपज थी. इस योजना के कारण बिहार के स्कूलों में छात्राओं की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. हालांकि आरसीपी सिंह ने कभी भी इसका श्रेय लेने की कोशिश नहीं की. फिर भी इस योजना को लेकर आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय मीडिया में पर्याप्त चर्चा मिली थी.

अभयानंद

वर्ष 2012 में ब्रम्हेश्वर मुखिया हत्याकांड के बाद रणवीर सेना सुप्रीमो की शवयात्रा के दौरान पटना की सड़कों पर रणवीर सेना के समर्थकों ने जम कर उत्पात मचाया था. गुस्साये समर्थकों ने आम लोगों को परेशान करने के अलावा जगह-जगह आगजनी की. किन्तु भीड़ को रोकने की जगह पुलिस पीछे हटती जा रही थी. विपक्ष और मीडिया द्वारा पुलिस के इस रवैये की जोरदार आलोचना की गई. तब डीजीपी अभयानंद खुद एक नये थ्योरी के साथ सामने आये.  मीडिया के सामने स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा कि पुलिस रणनीति के तहत ही पीछे हट रही थी. यदि पुलिस गुस्साये समर्थकों को रोकने की कोशिश करती तो स्थिति और अधिक अनियंत्रित हो सकती थी. बाद में काफी दिनों तक तत्कालीन डीजीपी अभयानंद के इस आइडिया को सराहा गया. कई संस्थानों की टीम ने इसे नये तरह की पुलिसिंग करार देते हुए रिसर्च करने बिहार का दौरा किया.

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