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पोंगापंथ का मीडियानुमा जाल और पटना के जिलाधिकारी की प्रशासनिक दृढ़ता

पटना के जिलाधिकारी के एक आदेश को लेकर मीडिया के एक वर्ग में हाय तौबा मचाया जा रहा है.  दरअसल पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि ने लॉकडाउन के बीच ईद के मद्देनजर तमाम व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिहाज से एक आदेश जारी किया है. इस आदेश में पटना को छ: जोन में बांटते हुए शर्त के साथ दुकानों को खोलने के आदेश जारी किये गये है.  इस आदेश में सप्ताह में मात्र मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को ही सैलून और व्यूटी पार्लर को खुले रखने का आदेश दिया है.

इस आदेश को लेकर सवर्णवादी खेमे के डिजिटल मीडिया में जानबूझ कर हो हल्ला मचाया जा रहा है कि इस दिन हिन्दू धर्म के लोग दाढ़ी-बाल नहीं कटवाते है. यह फैसला बदल दिया जाना चाहिए.

हो हल्ला कर रहे लोगों का तर्क कितना हास्यास्पद है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन तीनों दिनों भी सैलून खुले रहते है. इन डिजिटल मीडिया संस्थानों ने यह खबर तो चलाया है लेकिन किसी ने भी इस आदेश के विरोध में बयान देने वाले एक भी व्यक्ति को सामने नहीं लाया है.

यदि तर्क यह  है इन तीनों दिवस को यदि लोग दाढ़ी-बाल नहीं कटवाते है तो यह बेहद गलत है. सेना में, अर्ध सैनिक बलों में जो सबसे बड़े जोखिम के काम में लगें है, वे प्रतिदिन शेविंग करते है.देश के तमाम बाजारों में मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को भी तमाम सैलून खुले रहते है.

हालाँकि यह जरुर है कि कोरे पाखंड के चक्कर में कुछ लोग इस दिन शेविंग नहीं करवाते है. लेकिन यह तो पाखंड ही हुआ और लोगों को पाखंड से दूर रखने का कर्तव्य यदि कोई अधिकारी अनजाने में ही कर रहा है तो इसका स्वागत होना चाहिए.

सनद रहे कि एक सरकारी लोकसेवक का यह भी कर्तव्य होता है कि वह पोंगापंथ, पाखंड से लोगों को दूर रखें. यदि पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि पाखंड के इन तमाम धारणाओं को नजरअंदाज करते हुए विशुद्ध रूप से प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार ही आदेश जारी कर रहे हो तो इस पर हंगामा मचाने, अफवाह फैलाने वाले लोगों के विरुद्ध भी एक्शन लेना चाहिए.

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